Tuesday, March 25, 2008

मैं जिंदा हूँ

मैं जिंदा हूँ
धूल उडाती गाड़ियों के बीच
अधनंगे बच्चे के मुट्ठी में बंद
उस सच्चाई में
जिसे दुनिया से छुपा कर रखा है
तृप्त होने के लिए
जब गाड़ियों का शोर थम जायेगा.
मैं जिंदा हूँ
उन महफिलों की शान में
जो सजायीं जातीं हैं
जब मिसेज वर्मा सम्मानित होतीं हैं
'' मिसेज सोसाइटी'' से.
मैं जिंदा हूँ
भूखी वेश्या की उस सिलवट भरे चेहरे में
जिसने आज फिर रात बिताई है
अपने पति के साथ

1 comment:

Anonymous said...

Your lines are sheer magic..how can anyone write so well?